इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत के बाद सबसे ज्यादा डर अगर किसी के चेहरे पर है, तो वह है मां का डर। 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अब हालात ऐसे हैं कि हर मां अपने बच्चे को गोद में लेकर अस्पताल की ओर दौड़ रही है। बच्चे को सर्दी-खांसी हो, हल्का लूज मोशन हो या सामान्य बुखार हर छोटी परेशानी अब बड़े डर में बदल गई है। क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर बड़े अस्पतालों तक एक ही तस्वीर दिख रही है। मांएं बच्चों को सीने से लगाए, आंखों में डर और सवाल लिए डॉक्टरों के सामने खड़ी हैं। किसी को भरोसा नहीं कि उनका बच्चा सुरक्षित है। दरअसल, मरने वालों में शामिल 5 महीने के अव्यान की मौत के बाद मां साधना का बिलखता चेहरा, सरकार पर उठते सवाल और परिवार का दर्द हर किसी के दिल में घर कर गया है। यही वजह है कि अब मांएं किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहतीं। 201 मरीज भर्ती, 16 से ज्यादा बच्चे दूषित पानी की वजह से 201 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 16 से अधिक बच्चे शामिल हैं। इनकी उम्र 8 महीने से लेकर 12 साल तक है। शहर के चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में भागीरथपुरा के 19 बच्चों को भर्ती किया गया था। इनमें से 5 बच्चों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि 14 मासूम अभी इलाजरत हैं। सभी की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। अरबिंदो अस्पताल में भी 24 मरीज भर्ती हैं, जिनमें दो दूधमुंहे बच्चे 3 माह की काव्या और 10 माह की कनक शामिल हैं। दोनों को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद भर्ती किया गया। डॉ. निर्भय मेहता (प्रभारी, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय) के अनुसार, भागीरथपुरा से भर्ती बच्चों में उल्टी, दस्त और बुखार के लक्षण पाए गए हैं। इधर, गुरुवार रात मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अरबिंदो अस्पताल पहुंचे और भर्ती दोनों बच्चों की स्थिति को लेकर डॉक्टरों से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों के इलाज में कोई लापरवाही न हो। गर्भवती महिलाएं भी पहुंच रहीं अस्पताल भागीरथपुरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी बच्चों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि अब गंभीर स्थिति के मामले कम हैं। बच्चों की जांच कर वहीं दवाइयां दी जा रही हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए नंदानगर मेटरनिटी हॉस्पिटल और अन्य सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों और नर्सों को तैनात किया गया है। कई लोग निजी क्लिनिक में भी बच्चों को दिखा रहे हैं। अधिकांश बच्चे सामान्य सर्दी-खांसी से पीड़ित हैं। कई गर्भवती महिलाएं भी जांच के लिए यहां और निजी क्लिनिक पहुंच रही हैं। मांओं की लगातार बढ़ रही चिंता स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने वाली हर मां अपने बच्चे की तबीयत को लेकर डॉक्टरों से कई सवाल कर रही है। बुधवार शाम एक दंपती का स्टाफ से उस समय विवाद हो गया, जब बच्चे के लिए दिए गए सिरप पर एक्सपायरी 12 दिसंबर 2025 लिखी देखी गई। इसे देखकर दंपती ने एक्सपायरी दवा देने का आरोप लगाया। डॉक्टरों ने समझाया कि दवा एक्सपायर्ड नहीं है, फिर भी वे संतुष्ट नहीं हुए और वहां से चले गए। हालांकि दवाइयां एक्सपायर्ड नहीं थीं, लेकिन बच्चों की सेहत को लेकर हर परिवार चिंतित है। रहवासी संतोष पाल ने बताया कि शनिवार को उनके 8 वर्षीय बेटे को उल्टी-दस्त हुए थे, जबकि वे सालभर से उबला हुआ पानी पी रहे हैं। बुधवार को फिर से वही समस्या हुई, हालांकि अब बच्चा ठीक है। उन्होंने बताया कि बोरिंग का पानी भी ठीक नहीं आ रहा है। पिछले साल उनके बेटे को पीलिया हो चुका है, तब से डॉक्टर की सलाह पर उबला हुआ पानी ही पी रहे हैं। अब बोरिंग और आरओ का पानी पी रहे लोग सपना पाल का कहना है कि जब खराब पानी से 14 मौतें हो चुकी हैं, तो डर का माहौल बनना स्वाभाविक है। फिलहाल वे बोरिंग और आरओ का पानी पी रहे हैं। आशा वर्मा भी घबराई हुई हैं। वे भी बोरिंग के पानी का उपयोग कर रही हैं। उनका कहना है कि पिछले दो महीने से क्षेत्र में खराब पानी की समस्या बनी हुई है। हैजा सहित कई प्रकार के बैक्टीरिया की आशंका पानी के सैंपलों की शुरुआती रिपोर्ट में दूषित पानी की पुष्टि हुई है। कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार, विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में कल्चर टेस्ट किया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। एक्सपर्ट्स के अनुसार, दूषित पानी में अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया हो सकते हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में ड्रेनेज लाइन का पानी पीने की लाइन में मिलने की पुष्टि हुई है। ड्रेनेज के पानी में शौचालय से निकला मल-मूत्र, नहाने-धोने का पानी, साबुन, पाउडर, केमिकल आदि शामिल होते हैं। यदि यह पानी पीने की सप्लाई में मिल जाए तो अत्यंत घातक हो सकता है। ऐसे में Shigella, Salmonella, Cholera (हैजा), Escherichia coli जैसे बैक्टीरिया फैल सकते हैं। इनमें से किसी एक के कारण यह जानलेवा स्थिति बनी हो सकती है। यदि घातक बैक्टीरिया की पुष्टि होती है, तो प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। ये खबर भी पढ़ें... पाइपलाइन में लीकेज से पेयजल में मिला दूषित पानी इंदौर के भागीरथपुरा में 14 लोगों की जान दूषित पानी की वजह से ही गई है। इसकी पुष्टि गुरुवार को महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट से हो गई। CMHO डॉ. माधव हसानी ने कहा- सैंपल की जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर पुष्टि हुई है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और उनकी जान गई। पूरी खबर पढ़ें...