उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर प्रशांत भूषण और कपिल सिब्बल जैसे वकीलों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया है. समर्थकों का तर्क है कि बिना सबूत और बिना ट्रायल के पांच साल की कैद मानवाधिकारों का उल्लंघन है और यह फैसला लोकतांत्रिक असहमति को दबाने जैसा है.