चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो। सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें कई राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता की पहचान और वोट देने के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच के सामने दलीलें पेश कीं। द्विवेदी ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। भारत का संविधान नागरिक-केंद्रित है, इसलिए हर अहम पद पर केवल भारतीय नागरिक ही रह सकता है। इसी तरह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वोटर लिस्ट में सिर्फ योग्य भारतीय नागरिकों के नाम ही दर्ज हों। वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग राजनीतिक दलों की बयानबाजी का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। उसका मुख्य काम वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना है। संविधान के अनुच्छेद 324 में शक्तियों का उल्लेख SIR प्रक्रिया NRC जैसी नहीं अब इस मामले में आगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी। ये खबर भी पढ़ें: ममता बोलीं-SIR भाजपा के मोबाइल ऐप से हो रहा:चुनाव आयोग ने लोगों को परेशान किया, TMC सुप्रीम कोर्ट पहुंची पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया में भाजपा की आईटी सेल के बनाए मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा है। पढ़ें पूरी खबर...