अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के दस्तावेज सार्वजनिक हुए हैं। इसके मुताबिक पिछले साल अप्रैल में भारत के चलाए ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान कांप गया था। जंग रोकने के लिए पाकिस्तान ने लॉबिंग के तहत अपने राजनयिकों के जरिए अमेरिका में शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अफसरों के साथ करीब 60 बार संपर्क किया था। FARA के तहत दाखिल दस्तावेजों से पता चला है कि पाकिस्तानी राजनयिकों ने ईमेल, फोन कॉल, वनटूवन बैठकों के जरिए अप्रैल अंत से लेकर 4 दिनी ऑपरेशन सिंदूर के बाद तक संघर्ष विराम के लिए बैठकें जारी रखीं थीं। पाकिस्तान किसी भी तरह से भारत पर वॉशिंगटन का दबाव बनाकर युद्ध रुकवाना चाहता था। उसने ट्रंप प्रशासन तक तेजी से पहुंच बनाने और व्यापार व कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए 6 लॉबिंग फर्मों पर करीब ₹45 करोड़ खर्च किए थे। वॉशिंगटन में बातचीत के लिए भारतीय दूतावास ने लॉबिंग फर्म की ली मदद अमेरिकी लॉबिंग फर्म एसएचडव्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी ने अमेरिकी न्याय विभाग को FARA के तहत सौंपी रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कहा गया है कि अमेरिका में भारतीय दूतावास ने अमेरिकी सरकार और उसके अधिकारियों से संपर्क बढ़ाने के लिए फर्म की सेवाएं ली थीं। इस फर्म ने खुलासा किया है कि उसने ट्रंप प्रशासन के साथ कई अहम मुद्दों पर भारतीय दूतावास की बातचीत में मदद की। रिपोर्ट के मुताबिक फर्म ने अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय दूतावास के लिए काम किया। FARA में दी गई जानकारी के अनुसार 10 मई को इस फर्म ने भारतीय दूतावास की ओर से व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के रिकी गिल से संपर्क कराने में मदद की। इस दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी मीडिया कवरेज जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। 10 मई को ही भारत और पाकिस्तान के बीच चला 4 दिन का सैन्य टकराव समाप्त हुआ था। फर्म की भूमिका में बैठकों की व्यवस्था करना, फोन कॉल और ईमेल के जरिए दोनों देशों के अधिकारियों को जोड़ना शामिल था। इसके अलावा भारतीय दूतावास ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक कराने में भी मदद मांगी थी। कई एन्ट्रीज में भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता की स्थिति पर बातचीत का जिक्र है। इसी तरह एक अन्य अमेरिकी लॉबिंग फर्म सिडेन लॉ एलएलपी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि उसने पाकिस्तान को अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाने और भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान समर्थन देने में मदद की थी। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा- हमारा रिकॉर्ड वेबसाइट पर दूसरी ओर भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि संपर्क बढ़ाने के लिए अमेरिका में विभिन्न दूतावास, प्राइवेट कंपनियां और व्यावसायिक संगठन लॉबिंग फर्मों और कन्सलटेंट्स का सहारा लेते हैं। भारतीय दूतावास भी 1950 के बाद से ही आवश्यकता के अनुसार ऐसी फर्मों के साथ अनुबंध करता रहा है। अमेरिका में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत विदेशी सरकारों के साथ लॉबिंग करना कानूनी और स्थापित प्रथा है। जस्टिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसका पूरा रिकॉर्ड है कि कब-कब, किसने-किन लॉबिंग फर्मों के साथ संपर्क किया। इसे किसी प्रकार की मध्यस्थता के तौर पर देखना एकदम गलत है। कांग्रेस बोली- 10 मई को बहुत कुछ हुआ, तभी ऑपरेशन सिंदूर रोकने का ऐलान हुआ वहीं, अमेरिकी लॉबिंग फर्मों की रिपोर्ट्स पर कांग्रेस का कहना है कि 10 मई 2025 को बहुत कुछ हुआ, जिसके बाद ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का पहला एलान अमेरिका की ओर से किया गया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर लिखा- 10 मई को ही शाम 5:37 बजे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ऑपरेशन सिंदूर रोके जाने का पहला ऐलान किया, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस नेता अमिताभ दुबे ने कहा कि 10 मई को जिन अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया गया, उनमें यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर भी शामिल थे। इससे यह शक पैदा होता है कि क्या सैन्य कार्रवाई रोकने के फैसले में व्यापार से जुड़े पहलू भी थे।