तमिलनाडु में संघ के विस्तार की जिम्मेदारी नागपुर के एक दुबले-पतले युवा दादाराव परमार्थ को दी गई थी. डॉ. हेडगेवार ने उन्हें खर्चे के लिए 20 रुपये दिए थे. वह समुद्र तट पर सोते थे, मंदिरों में भोजन करते थे, स्थानीय भाषा का ज्ञान न होने के बावजूद उन्होंने कई महीनों तक संघर्ष किया. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है वही कहानी.