गुजरात में नर्मदा जिले के राजपीपला शहर के पास स्थित प्रसिद्ध धर्मेश्वर महादेव मंदिर के पुराने भवन से बाघ की 37 खालें और 133 नाखून जब्त हुए हैं। वन विभाग ने खालों और नाखूनों के 30- से 35 साल पुराने होने का अनुमान लगाया है। हालांकि, वन विभाग ने इनकी प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए नमूने वन सेवा विभाग (एफएसएल) को भेजे हैं। जर्जर मकान की मरम्मत के दौरान मिली खालें राजपीपला शहर के हनुमान धर्मेश्वर मंदिर के कैंपस में जर्जर मकान की मरम्मत के दौरान बदबू आने पर मंदिर ट्रस्टियों ने वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन-विभाग की टीम मौके पर पहुंची और एक कमरे से बाघों की खाल और नाखूनों से भरी एक पूरी पेटी बाहर निकाली। 30-35 साल पुरानी हैं खाले वन विभाग की टीम को मौके से लुप्तप्राय बाघों की 37 पूरी खालें, 4 खालों के टुकड़े और करीब 133 बाघों के नाखून मिले हैं। खालों और नाखूनों को एफएसएल जांच के लिए भेज दिया गया है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ये खालें करीब 35 साल से अधिक समय से पेटी में रखी हुई थीं। मंदिर के पुजारी रहते थे इस मकान में मंदिर ट्रस्टी प्रकाश व्यास ने बताया कि मकान के जिस कमरे से बाघों की खाल और नाखूनों से भरी पेटी मिली है। उस कमरे में कभी मंदिर का पुजारी महाराज रहा करता था। पुजारी का तीन महीने पहले निधन हो चुका है। पुजारी मध्यप्रदेश के रहने वाले थे और उनके पास देश भर से साधुओं का आना-जाना भी रहता था। दूर-दराज से आए कई साधु पुजारी के कमरे में ही ठहरा करते थे। आरएफओ जिग्नेश सोनी ने बताया कि जांच के दौरान बाघों की कुल 37 खालें और 133 नाखून बरामद किए गए हैं। वन विभाग ने वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 172 के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। 1992 में टाइगर मैप से बाहर हो गया था गुजरात गुजरात आखिरी बार 1989 की राष्ट्रीय बाघ गणना में शामिल था। हालांकि, इस दौरान भी बाघों के पगमार्क दर्ज किए गए थे, क्योंकि, गणना के दौरान किसी बाघ का प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हुआ था। इसके चलते 1992 में गुजरात को टाइगर मैप से बाहर कर दिया गया था। 2019 में एक बाघ की पुष्टि हुई थी, लेकिन वह बाघ केवल 15 दिन ही जीवित रहा। इस साल टाइगर मैप में शामिल हो सकता है गुजरात भारत के टाइगर मैप पर अपनी जगह खोने के तीन दशक से ज्यादा समय के बाद, गुजरात को फिर से टाइगर स्टेट रूप आधिकारिक दर्जा मिल सकता है। क्योंकि, पिछले दिसंबर महीने में दाहोद जिले के रतनमहल अभयारण्य में एक बाघ की फोटोग्राफिक पुष्टि हुई है। इसी के चलते राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने रतनमहल अभयारण्य (Ratanmahal Sanctuary) में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए राज्य को आगामी 2026 की बाघ जनगणना (Census 2026) में शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… डिप्टी कमिश्नर के घर मिली बाघ की खाल:बैठने के लिए करते थे इस्तेमाल; EOW को छापे में मिली पौने 7 करोड़ की प्रॉपर्टी मध्यप्रदेश में आदिम जाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर जगदीश सरवटे के जबलपुर स्थित घर से बाघ की खाल बरामद की गई है। यह खाल करीब 30 साल पुरानी बताई जा रही है, जिसे आसन के रूप में बैठने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। पूरी खबर पढ़ें…