11 जनवरी 1945. उत्तर प्रदेश में झांसी जिले के गरौठा इलाके का सिमरधा गांव. अंग्रेजों के फरमान के खिलाफ एक गांव का सामूहिक विद्रोह इतिहास में दर्ज है. उस दिन इस गांव में बगावत की आग ऐसी सुलगी कि चूल्हे नहीं जले, घर खाली रहे और अंग्रेजों ने बर्तन-भाडे़ तक बाहर फेंक दिया. आतंक से सहमे लोग खेत-खलिहानों में छिपे रहे. अंग्रेजी जुल्म के खिलाफ यह द्वितीय विश्व युद्ध के लिए 'न पाई, न भाई' देने के ऐलान का नतीजा था.