भारतीय इतिहासकार प्रोफेसर मक्खन लाल का कहना है कि कोई भी देश अपने अतीत को काटकर या अपनी पहचान को मिटाकर आगे नहीं बढ़ सकता. 1953 में फ्रांस से करीब बीस लोगों का एक फ्रेंच डेलिगेशन पांडिचेरी आया और भारत के विभिन्न हिस्सों जैसे बनारस, इलाहाबाद, कश्मीर की यात्रा की. इसके बाद उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू से मिलने का समय मांगा. नेहरू जी ने समय दिया क्योंकि वे उस समय प्रधानमंत्री थे. फ्रेंच डेलिगेशन ने भारतीय सभ्यता की बहुत प्रशंसा की और कहा कि यह विश्व को विनाश से बचा सकती है. इस पर नेहरू जी ने उत्तर दिया कि वे उसी चीज की तारीफ कर रहे हैं जिसे वे नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह बात फ्रेंच मैगजीन में भी कही जो इंटरनेट पर उपलब्ध है. इस घटना से पता चलता है कि अपनी सभ्यता को समझना और उसका सम्मान करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की पहचान है.