ओवैसी ने कहा कि भारत और महाराष्ट्र में हर समुदाय की अपना राजनीतिक नेतृत्व होता है। लेकिन मुसलमानों के पास अपनी राजनीतिक एजेंसी नहीं रही है। वे केवल वोटर की भूमिका में सीमित रह गए हैं। इस स्थिति का प्रभाव उनके समुदाय की आवाज़ और अधिकारों पर पड़ता है। इस बात को समझना और सुधारना जरूरी है ताकि मुसलमान भी राजनीतिक संदर्भ में सक्रिय और प्रभावी बन सकें।