2025 प्रयागराज कुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने अब सनातन धर्म की राह छोड़ने का ऐलान कर दिया है। हर्षा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि वह “सीता माता नहीं हैं” और मौनी अमावस्या के बाद धर्म के रास्ते से हटकर अपने पुराने प्रोफेशन में लौट जाएंगी। हर्षा के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया से लेकर संत समाज तक बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे आस्था से जुड़ा निजी निर्णय मान रहे हैं, तो कई इसे सनातन धर्म का अपमान बता रहे हैं। इसी मुद्दे पर दैनिक भास्कर एप ने काली सेना के प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप जी से बात की। उन्होंने हर्षा को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की और कहा कि “सनातन धर्म कोई बॉयफ्रेंड नहीं है कि आज पकड़ लिया और कल छोड़ दिया।” उन्होंने अखाड़ों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और 2027 हरिद्वार कुंभ को लेकर सख्त रुख की बात कही। सवाल-जवाब में पढ़िए पूरा इंटरव्यू... सवाल: हर्षा रिछारिया ने ऐलान किया है कि वो सनातन की राह छोड़ रही हैं, उन्होंने लिखा- मैं सीता माता नहीं हूं, आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: उन्होंने सही बात अपनी कह दी है कि वो सीता माता नहीं है। मैंने पहले दिन ही कह दिया था कि ये रीलबाज है, ये साधु नहीं है। इन लोगों को सनातन धर्म से कोई मतलब नहीं है। ग्लैमर की दुनिया से आई है और साक्षात प्रकट हो गई कुंभ में। सवाल: आपने कहा कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, आप किस आधार पर ये मांग कर रहे हैं? जवाब: इन ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। मैं अखाड़ों को भी कहता हूं कि आप ऐसे लोगों को लाकर उनके पक्ष में खड़े हो जाते हैं। ना उनका बैकग्राउंड चेक करते हैं। ये लोग कैसे हैं, किस लिए आए हैं, इनका हेतु क्या है? अब उन्होंने कहा कि लोगों ने आलोचना की है। सवाल: हर्षा ने पोस्ट में लिखा कि वह “सीता नहीं हैं” और अग्नि परीक्षा नहीं दे सकतीं। क्या सच में उनसे कोई अग्नि परीक्षा मांगी गई? जवाब: अग्नि परीक्षा कौन मांग रहा है तुम्हारी? तुम स्वयं अपनी बातें अपने से कह रही हो। हमने तो किसी ने कहा नहीं कि तुम अपनी परीक्षा दो। लेकिन ऐसे जो लोग हैं वो हमेशा से सनातन धर्म को बदनाम करते हैं और बदनाम करके चले जाते हैं। यही लोग नहीं, मैं उन तथाकथित किन्नरों को भी कहूंगा जिन्होंने सनातन धर्म को इस समय बदनाम कर रखा है। ये लोग भी कुंभ में यदि आएंगे तो उस पर जो भी करना पड़ेगा, हम काली सैनिकों को लगा करके, लठ देकर इन लोगों को बाहर करने का काम करेंगे। सवाल: 2027 हरिद्वार कुंभ में क्या ‘रीलबाजों’ को रोका जाएगा और क्यों? जवाब: देखो हमारा सनातन धर्म कहता है- अहिंसा परमो धर्म। लेकिन आज यदि इन नालायकों की वजह से हमारा धर्म बदनाम हो रहा है तो हम इनको निश्चित रूप से बाहर रखेंगे। यदि मछली मर के सड़ रही है पानी में, तो उस मछली को निकालना है ना कि पानी को साफ करना है। तो ये मरी हुई मछलियां हैं, इनको बाहर करना पड़ेगा। सवाल: क्या 2027 से पहले अखाड़ों से बातचीत की जाएगी कि इस तरह के लोग कुंभ में न आएं? जवाब: मैं हमेशा से इस पक्ष में रहा हूं कि अखाड़ों को समृद्ध होना चाहिए। अखाड़े किस निमित्त बने थे? धर्म रक्षा के लिए। आज क्या हो रहा है- फर्जी लोगों को इकट्ठा करके एक तंत्र खड़ा किया जा रहा है। ऐसे लोग जिनको आप भिखारी भी नहीं कह सकते, उनको महामंडलेश्वर बना-बना करके महामंडलेश्वर की गरिमा और पद की प्रतिष्ठा धूमिल की जा रही है। सवाल: आगे क्या समाधान होना चाहिए? जवाब: मैं चाहूंगा कि 2027 से पहले नए-नए अच्छे संतों को अखाड़ों में सम्मिलित करके श्रीमहंतों के द्वारा उसको पुनः स्थापित किया जाए, नहीं तो आने वाले समय में अखाड़े केवल मजाक के पात्र बन जाएंगे। ------------------ ये खबर भी पढ़ें... हर्षा रिछारिया बोलीं- सनातन धर्म मानने वाला होगा मेरा दूल्हा:कौशांबी में कहा- एक्टर-मॉडल को जीवनसाथी नहीं बनाऊंगी; अब जिंदगी सुकून दे रही सनातन प्रचारक हर्षा रिछारिया रविवार को कौशांबी पहुंचीं। यहां उन्होंने कहा कि उनका होने वाला जीवनसाथी एक्टर या मॉडल नहीं होगा। वह सनातन धर्म काे मानने वाला होगा। शादी को लेकर परिवार का कोई दबाव नहीं है। उनका सपोर्ट और प्यार हमेशा मिला है। (पढ़ें पूरी खबर)