मुंबई में पहली बार बीजेपी का मेयर होगा:4 साल से पद खाली है; BMC चुनाव में भाजपा गठबंधन आगे

महाराष्ट्र की 29 नगर निगम के लिए शुक्रवार सुबह 10 बजे से काउंटिंग जारी है। 29 में 23 नगर निगमों बीजेपी गठबंधन आगे है। मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक में गठबंधन को बड़ी बढ़ित हासिल है। सभी निगमों में सबसे अहम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) है। यहां भाजपा और शिवसेना गठबंधन आगे चल रहा है। उम्मीद है कि इस बार भाजपा का मेयर बन सकता है। बीमएसी के इतिहास में अभी तक भाजपा का कोई नेता मेयर नहीं बना है। महाराष्ट्र के मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने वाला है। मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जिन्होंने 22 नवंबर, 2019 से 8 मार्च, 2022 तक यह पद संभाला था। हालांकि तब शिवसेना में बंटवारा नहीं हुआ था। पिछले नगर निगम चुनाव फरवरी 2017 में हुए थे। पार्षदों का पांच साल का कार्यकाल 7 मार्च, 2022 को खत्म हो गया था। तब से, BMC के प्रशासन की जिम्मेदारी नगर आयुक्त संभाल रहे हैं। कैसे होता है मेयर का चुनाव बीएमसी में अलग-अलग वार्डों से चुनकर कुल 227 पार्षद आते हैं, जिन्हें मुंबई में नगर सेवक या फिर कॉरपोरेटर कहा जाता है। जिस पार्टी का बहुमत होता है, उसी की मेयर पद की उम्मीदवारी में सबसे बड़ी दावेदार होती है। नगर निकाय चुनाव में जीतकर आने वाले पार्षद ही मेयर का चुनाव करते हैं। मेयर का कार्यकाल 2.5 साल का होता है, वहीं पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं। एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे मेयर का चुनाव होता है। मेयर के पास क्या-क्या पॉवर होती है बीएमसी में मेयर और कमिश्नर दो पद सबसे बड़े होते हैं। मेयर नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। शहर का औपचारिक प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रस्तावों और बहसों पर चर्चा करते हैं। मतलब मेयर का काम ज्यादातर औपचारिक और प्रतिनिधित्व तक सीमित होता है। जबकि असली प्रशासनिक और कार्यकारी ताकत कमिश्नर के पास होती है। कमिश्नर शहर का रोजमर्रा प्रशासन चलाते हैं। बजट, शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और कर्मचारियों का कंट्रोल उनके हाथ में होता है। कमिश्नर आम तौर पर IAS अधिकारी होते हैं। इसलिए, शहर चलाने की असली ताकत हमेशा कमिश्नर के पास होती है। BMC चुनाव क्यों है खास 74,000 करोड़ रुपए के बजट वाली एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी BMC पर बिना बंटे शिवसेना ने (1997-2017) तक राज किया था। तब BJP उसकी सहयोगी थी। मुंबई नगर निगम का बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के बजट से भी बड़ा है।