मोहन भागवत ने कहा कि संघ न तो किसी का विरोध करता है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा में है. इसका उद्देश्य केवल एक मजबूत और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करना है.