बीएमसी चुनाव ने महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है. 25 साल बाद शिवसेना का किला ढह गया और पहली बार बीएमसी में बीजेपी का मेयर बनना लगभग तय है. ठाकरे ब्रदर्स की एकजुटता भी मतदाताओं को नहीं रिझा सकी. नतीजों ने बाला साहेब की विरासत और ठाकरे राजनीति के भविष्य पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं.