मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए सुरक्षाबल सख्त अभियान चला रहे हैं। इससे बौखलाए कुकी उग्रवादी समूहों ने राज्य को एक बार फिर अशांत करने की साजिश शुरू कर दी है। कुकी उग्रवादियों न सेनापति जिले के नगा बहुल इरेंग नगा गांव में कुकी लैंड और दूर रहो लिखकर केंद्र और राज्य सरकारों को खुली चुनौती दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बीते दिनों रात के समय अज्ञात हथियारबंद लोग गांव में दाखिल हुए और तोड़-फोड़ करते हुए मेमोरियल स्टोन पर नारा लिख दिया। गांव वालों ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इसके चलते क्षेत्र में नए सिरे से अशांति फैलने की आशंका गहरा गई है। खुद को टाइगर किप्गेन उर्फ थांग्बोई/हाउगेंथांग किप्गेन बताने वाले केएनएफ-पी के कमांडर ने गांव के चेयरमैन को फोन कर हत्या और पूरे गांव को जला देने की धमकी दी। चूराचांदपुर रोड किया ब्लॉक घटना के बाद नगा ग्रामीणों ने शनिवार को कंग्पोक्पी-चूराचांदपुर रोड को ब्लॉक कर दिया। लियांग्माई नगा काउंसिल और नगा पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन (NPO) ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी हैै। कई नगा संगठनों ने जॉइंट ट्राइबल बॉडीज के साथ मिलकर ट्रैफिक और ट्रेड ब्लॉकेड की धमकी दी है। मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। हिंसा के बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफे दे दिया था। केंद्र ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया है। 4 पॉइंट्स में समझिए मणिपुर हिंसा की वजह... मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।