बदल जाएगा वाराणसी का ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट, पुनर्निमाण के बाद ऐसा दिखेगा

कहते हैं भगवान शिव ने मणिकर्णिका घाट अपने रहने के लिए बसाया था. जब ये घाट बसा तो गंगा नहीं थी, बल्कि एक कुंड हुआ करता था. स्नान करते वक्त भगवान शिव के कान का कुंडल उस कुंड में गिर गया और तब से इसका नाम मणिकर्णिका पड़ गया.