पहले एंग्लो-सिख युद्ध के खूनी अंतिम अध्याय में, सोबरांव के मैदान पर 35,000 खालसा योद्धा लगभग पूर्ण विनाश के सामने खड़े थे. विश्वासघात के आरोप, टूटता हुआ नावों का पुल और ब्रिटिश संगीनों की मार ने महाराजा रणजीत सिंह की विरासत को डुबो दिया. इसी हार से कश्मीर की बिक्री का रास्ता खुला और सिख साम्राज्य का अंत तय हो गया.