दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह गैंग चोरी की गाड़ियों को 'टोटल लॉस' (हादसे में खत्म हुई) गाड़ियों के चेसिस नंबर का इस्तेमाल कर दोबारा रजिस्टर कराता था.