नई दिल्ली. 21वीं सदी के साथ ही मोबाइल क्रांति ने शहर से देहात तक जीवन को काफी बदल दिया। एआइ, डीपटेक और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस डिजिटल छवि के बावजूद देश की मिट्टी में रची-बसी सदियों पुरानी परंपराओं की खुशबू आज भी वैसी ही है। खास बात ये है कि इन परंपराओं को बुजुर्ग ही नहीं युवा पीढ़ी भी पूरी आस्था और गर्व से आगे बढ़ा रही है। जिस दौर में स्मार्ट लॉक और फिंगरप्रिंट सेंसर जैसी सुरक्षा की तकनीक के बावजूद घर के दरवाजे खुले छोड़ दिए जाते हों। मकान बनाने की एक से बढकऱ एक निर्माण शैली और साधन संपन्न होने के बावजूद पक्के घर नहीं बनाए जाते हों तो इसे परंपराओं में अटूट विश्वास ही कहा जाएगा। ऐसे ही कई अनोखी परंपराएं हैं, तो आज भी उसी स्वरूप में जिंदा हैं, जो सदियों पहले थीं। खास बात ये है कि युवा पीढ़ी