लखनऊ के घाट पर शवों की कतार…पत्रकार ने कागज पर उतारी आंखोंदेखी और आपबीती

ज्योति यादव को एक राजनीतिक असाइनमेंट पर उनकी संस्था की ओर से लखनऊ भेजा गया था। उन्हें मुलायम सिंह यादव पर स्टोरी करनी थी, लेकिन यह हो नहीं पा रही थी। 2022 में यूपी में चुनाव होने थे। इसके मद्देनजर यह अच्छी स्टोरी हो सकती थी। खास कर तब जब उन्हें हाल ही में मुलायम की बीमारी की खबर पता चली थी। लेकिन, मुलायम या अखिलेश से संपर्क की उनकी सारी कोशिशें नाकाम जा रही थीं। वह समाजवादी पार्टी के दफ्तर गईं तो वहां फोन जमा करने के लिए कहा गया। इससे नाराज होकर वह वहां से लौट आईं।