24 फरवरी 2026, रूस-यूक्रेन युद्ध की चौथी बरसी पर यूक्रेन ने रूस के ऊर्जा ढांचे पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है. लंबी दूरी के ड्रोन रूस के भीतर 1,200 किलोमीटर गहराई तक घुस गए और तातारस्तान इलाके के कलेकिनो तेल पंपिंग स्टेशन को धमाकों से दहला दिया. ‘ड्रुज़्बा’ पाइपलाइन का यह सबसे अहम हब अब आग और मलबे में तब्दील हो चुका है. इस हमले से सीधा असर हंगरी और स्लोवाकिया पर पड़ा है. हंगरी को यहां से उसकी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल मिलता था, जबकि स्लोवाकिया का शत-प्रतिशत तेल सप्लाई इसी स्टेशन से होता था. हमले के बाद गुस्साए स्लोवाकिया ने यूक्रेन को बिजली की सप्लाई बंद कर दी है. स्लोवाकिया यूक्रेन को उसकी जरूरत की लगभग 18 प्रतिशत बिजली देता था. यह हमला युद्ध को ऊर्जा मोर्चे पर और ज्यादा खतरनाक बना रहा है.