केरल में सरकारी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और विभिन्न लाभार्थियों सहित करीब 5 लाख लोगों को वॉट्सएप पर चुनावी संदेश भेजकर केरल सरकार घिर गई है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को नाराजगी जताते हुए पूछा कि मुख्यमंत्री कार्यालय को इनके मोबाइल नंबर कैसे मिले। कोर्ट ने डेटा सोर्स की पुष्टि तक ऐसे संदेश भेजने पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस पहल में गोपनीयता की कमी है। साथ ही, संदेह जताया कि कहीं वेतन और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए बने एसपीएआरके पोर्टल का डेटा गलत तरीके से मुख्यमंत्री कार्यालय तक तो नहीं पहुंचाया गया। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक डेटा का राजनीतिक प्रचार के लिए उपयोग अनुच्छेद-21 के तहत निजता के अधिकार और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट ने पूछा है कि डेटा प्रोसेसिंग का कानूनी आधार क्या है? हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। याचिका में आरोप है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने गोपनीयता कानून का उल्लंघन कर विधानसभा चुनाव से पहले सीएम के फोटो वाले वॉट्सएप संदेश भेजे। इनमें 10% डीए बढ़ोतरी जैसे काम गिनाए गए थे। केरल: इकलौता राज्य जहां लेफ्ट सत्ता में, इसी साल चुनाव केरल देश का इकलौता राज्य है, जहां अभी भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी। वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… केरल चुनाव से 3 महीने पहले दक्षिण में कुम्भ: पेशवाई जैसी रथयात्रा केरल के मल्लपुरम जिले का मात्र 37 हजार की आबादी वाला छोटा सा कस्बा तिरुनावाया। वैसे तो यह जगह राज्य के प्राचीन भगवान नवमुकुंद (विष्णु) मंदिर और यहां हर 12 साल में होने वाले मामांकम उत्सव के लिए विख्यात है, लेकिन इस बार यहां 18 जनवरी से 'दक्षिण भारत का पहला कुम्भ' होने जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…