चेहरे पर रंग, मन में भेद... संत कबीर की अनोखी होली जो घमंड जलाकर मनती है
संत कबीर ने होली को केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आत्मा की जागरूकता और प्रेम का प्रतीक बताया है. उनकी होली बाहरी रंगों से नहीं, बल्कि भीतर के रंगों से जुड़ी है, जो स्थायी है.