'स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाए आरोप...', बोले वकील

इस मामले में मुख्य तर्क यह था कि मामला झूठा है. प्रस्तुत दस्तावेज़ और पुलिस की रिपोर्ट में इतने विरोधाभास हैं कि ये सत्य प्रतीत नहीं होते. इसलिए, यह कहना उचित है कि मामले की जांच आवश्यक है क्योंकि पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. इस आधार पर अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए ताकि न्याय की प्रक्रिया सही तरीके से हो सके. रिपोर्ट में परस्पर विरोधी तथ्य मामले की सच्चाई पर सवाल उठाते हैं और यह साफ संकेत देते हैं कि आरोप सही नहीं हैं.