ईरान युद्ध के दौरान चीन की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल उठ रहा है. 25 साल के समझौते और बड़े निवेश के दावों के बावजूद बीजिंग ने सैन्य समर्थन से दूरी बनाए रखी है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ईरान का सहयोगी नहीं बल्कि आर्थिक कर्जदाता की तरह व्यवहार कर रहा है और अपने बड़े खाड़ी हितों को प्राथमिकता दे रहा है.