अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस के जिस तेल-गैस को खरीदने से देश कतराते थे, ईरान युद्ध के कारण उसकी डिमांड में जबरदस्त उछाल आया है. नतीजा ये कि 2022 के बाद पहली बार, भारत को अपने बंदरगाहों पर रूसी तेल की डिलीवरी यूरोपीय ब्रेंट क्रूड से भी महंगे दाम पर लेनी पड़ रही है.