कम उम्र में क्यों कमजोर हो रहा दिल?:खेलते हुए, नींद में… चलते-चलते अटैक, एक्सपर्ट बोले- ब्लॉकेज नहीं, लेकिन बिगड़ रही धड़कन की लय

23 फरवरी 2026 को नागौर में 9 साल की मासूम दिव्या स्कूल में दूसरे बच्चों के साथ खेल रही थी। अचानक जमीन पर गिरी। हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। दिव्या को दिल का दौरा पड़ा था। 5 दिन बाद बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ में 12वीं क्लास में पढ़ने वाली पूजा मीणा बोर्ड परीक्षा देने जाते समय अचानक रास्ते में बेहोश होकर गिर गई। उसकी मौत हो गई। बताया गया कि उसकी मौत भी हार्ट अटैक से ही हुई थी। इन घटनाओं ने हर घर में बेचैनी बढ़ा दी है। दो सवाल मन में उठ रहे हैं- कम उम्र में दिल कमजोर क्यों हो रहा है? मासूमों को हार्ट अटैक से बचाने के लिए क्या किया जा सकता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने दोनों बच्चियों के घरवालों से बात की। उनकी मेडिकल हिस्ट्री, डेली रूटीन के बारे में जाना। साथ ही राजस्थान और दिल्ली के टॉप कार्डियोलॉजी एक्सपट्‌र्स से बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… नागौर : जेनेटिक मेडिकल प्रॉब्लम की आशंका, बड़े भाई की भी 4 महीने पहले मौत नागौर के गोटन कस्बे के पास ही टालनपुर गांव के रहने वाले किसान राजेंद्र बापेडिया की 9 साल की बेटी दिव्या गोटन प्राइवेट स्कूल में पांचवीं क्लास की स्टूडेंट थी। 23 फरवरी की सुबह वो रोज की तरह स्कूल आई थी। प्रेयर शुरू होने में समय था। ऐसे में दिव्या भी दूसरे बच्चों के साथ ग्राउंड में खेल रही थी। खेलते समय अचानक दिव्या बेहोश होकर गिर पड़ी। स्कूल स्टाफ ने परिवार वालों को सूचना देने के साथ ही दिव्या को बिना देर किए गोटन के राजकीय हॉस्पिटल पहुंचाया गया। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घाेषित कर दिया। गोटन हॉस्पिटल के प्रभारी डॉक्टर सुखराम बेरवाल ने बताया कि दिव्या के शरीर पर किसी प्रकार की बाहरी चोट के निशान नहीं थे। बच्ची को पहले से कोई बीमारी भी नहीं थी। प्राइमरी इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि कार्डियक अरेस्ट से उसकी मौत हुई थी। परिजनों ने पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया था। हमें बाद में पता चला कि 4 महीने पहले इसी तरह दिव्या के भाई अभिषेक की भी मौत हुई थी। ऐसे में हो सकता है कि ये जेनेटिक मेडिकल प्रॉब्लम हो। हमने पूरे परिवार को कार्डियोलॉजी की जांचें करवाने को कहा है। ताऊ ने बताया दोनों बच्चों की नहीं थी मेडिकल हिस्ट्री डॉक्टर से बात करने के बाद रिपोर्टर ने दिव्या के ताऊ विनोद बापेडिया से बात की। उन्होंने बताया कि 4 महीने में उनके भाई राजेंद्र के 2 बच्चों की हार्ट अटैक से मौत हो गई। 9 सितंबर 2025 को दिव्या के बड़े भाई 16 साल के अभिषेक की नींद में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। विनोद ने बताया कि दिव्या और अभिषेक का रूटीन आम बच्चों की तरह ही था। दोनों कहीं से कमजोर नहीं थे। आम तौर पर होने वाले वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम के अलावा कोई मेडिकल हिस्ट्री नहीं थी। जहां तक डाइट की बात है तो घर में बनने वाली गेहूं और बाजरे की रोटी व सब्जियां ही खाते थे। ज्यादा जंक फूड या बाहरी आइटम भी नहीं खाते थे। बांसवाड़ा : पूजा की भी नहीं थी मेडिकल हिस्ट्री, रूटीन भी नॉर्मल बांसवाड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सागवा की 12वीं की स्टूडेंट 18 साल की पूजा मीणा प्रतापगढ़ के नया खेड़ा गांव की रहने वाली थी। सागवा में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। 28 फरवरी 2026 को उसका कृषि विज्ञान का पेपर था। सहेलियों के साथ एग्जाम सेंटर जा रही थी। रास्ते में पूजा को चक्कर आया और वह बेहोश हो गई। सज्जनगढ़ हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि उसे हार्ट अटैक आया था। इस बारे में हमने सज्जनगढ़ एसएचओ धनपत सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि प्राइमरी तौर पर डॉक्टर्स ने इसे हार्ट अटैक ही माना है। हालांकि मेडिकल टीम ने पोस्टमॉर्टम किया है। ज्यादा डिटेल्स रिपोर्ट आने पर पता चलेगी। इसके बाद हमने पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर सुनील माइडा से बात की। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट हुआ था। इसी वजह से मौत हो गई। हालांकि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि अचानक कार्डियक अरेस्ट की वजह क्या थी। पिता बोले- 2 साल पहले खून की कमी हुई थी, जो ठीक भी हो गई हॉस्टल वार्डन प्रियंका चरपोटा ने बताया कि पूजा 2 साल से उनके हॉस्टल में थी। छुट्टियों में अपने गांव जाती थी। उसकी कभी भी कोई मेडिकल हिस्ट्री सामने नहीं आई। न ही कभी तबीयत खराब हुई। वो भी दूसरे बच्चों की तरह ही हॉस्टल में बना सिंपल खाना खाती थी। एग्जाम के चलते रात 10-11 बजे सो जाती थी और सुबह 5 बजे उठ जाती थी। डेली रूटीन और डेली डाइट प्लान नॉर्मल ही था। पूजा के पिता बंशीलाल मीणा ने बताया कि उनके परिवार में कभी किसी को हार्ट प्रॉब्लम नहीं हुई। पूजा की भी कोई मेडिकल हिस्ट्री नहीं रही। हालांकि उसे दसवीं क्लास में पढ़ने के दौरान एक बार शरीर में खून की कमी की प्रॉब्लम हुई थी, जो ट्रीटमेंट के बाद ठीक हो गई थी। इसके अलावा कोई प्रॉब्लम नहीं हुई थी। सीकर में टिफिन खोलते बच्ची की मौत 16 जुलाई 2025 को सीकर जिले के दांतारामगढ़ में उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 9 वर्ष की प्राची कुमावत इंटरवल में टिफिन खोलते समय जमीन पर गिर गई थी। उसे सरकारी हॉस्पिटल ले गए। इलाज के कुछ समय बाद बच्ची नॉर्मल हो गई थी। डॉक्टर ने उसे सीकर हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी। सीकर ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। उस समय दांतारामगढ़ सीएचसी प्रभारी डॉ. आर के जांगिड़ ने बताया था कि प्राची को बेहोशी की हालत में लाया गया था। उसे कार्डियक अरेस्ट आया था। प्राथमिक इलाज के बाद उसे सीकर रेफर किया गया था। प्राची के दादा रामेश्वर कुमावत ने तब बताया था कि उनकी पोती को कोई बीमारी नहीं थी। कुछ दिनों से सर्दी-जुकाम था। वह रोजाना स्कूल जाती थी। अब जानिए बच्चाें में हार्ट अटैक के केसेज को लेकर मेडिकल एक्सपट्‌र्स की राय… कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर हरिमोहन मीणा कहते हैं- बच्चों में अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामले दुर्लभ होते हैं, लेकिन पूरी तरह असंभव नहीं हैं। कई मामलों में अस्थमेटिक अटैक भी अचानक सांस रुकने या बेहोशी जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में शुरुआत में लोगों को यह हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट जैसा लग सकता है। अस्थमा के तेज अटैक के दौरान फेफड़ों की नलियां अचानक सिकुड़ जाती हैं। इससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत, सीने में जकड़न और ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। ऐसे मामलों में सही कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम और मेडिकल जांच बेहद जरूरी होती है। कई बार यह समस्या जन्मजात दिल की बीमारी, दिल की मांसपेशियों की कमजोरी या हार्ट रिदम से जुड़ी गड़बड़ी की वजह से भी हो सकती है, जिसका पहले से पता नहीं चल पाता। कई बार बच्चों में दिल से जुड़ी कुछ समस्याएं जन्म से ही मौजूद होती हैं, लेकिन उनके कोई स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते। ऐसे मामलों में अचानक अत्यधिक शारीरिक गतिविधि, दौड़ना या खेलते समय दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, जिससे अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में यह समस्या दिल की मांसपेशियों की बीमारी (कार्डियोमायोपैथी), दिल की धड़कन की अनियमितता या जन्मजात हृदय रोग के कारण भी हो सकती है। डॉ. मीणा का कहना है कि यदि किसी बच्चे को खेलते समय अचानक चक्कर आए, बेहोशी हो, सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द महसूस हो तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत मेडिकल जांच करानी चाहिए। नियमित हेल्थ चेकअप और हार्ट स्क्रीनिंग से कई गंभीर जोखिमों को समय रहते पहचाना जा सकता है। लाइफ स्टाइल में बदलाव भी बड़ी वजह लोकसभा स्पीकर के वेलफेयर ऑफिसर डॉक्टर सौरभ शर्मा का कहना है कि बच्चों में कार्डियक अरेस्ट के रेयर केस होते हैं। हाल में जो सामने आया है उसकी मुख्य वजह तो लाइफस्टाइल में आया बदलाव ही है। दरअसल आज-कल हर बच्चे के खाने में जंक फूड व हाई साल्टेड के साथ ही हाई ऑयल्ड खाना शामिल हैं। इसके चलते ही न सिर्फ उनका ब्लड गाढ़ा हो रहा है, बल्कि फैट भी बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा पोस्ट कोविड के बाद इंफेक्शन और वायरल की वजह से भी कई बार ब्लड के गाढ़ा पड़ने व ब्लड सप्लाई में दिक्कत की बातें सामने आई हैं। कम उम्र के लोगों में ये एक पोस्ट कोविड इफेक्ट का ट्रेंड बना है। इसकी वजह से दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है। हार्ट बीट कभी बढ़ जाती है तो कभी इसकी रिदम थम जाती है। इसी वजह से अचानक कार्डियक अरेस्ट होने के मामले सामने आते हैं। हालांकि कार्डियक अरेस्ट की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। -------------- राजस्थान में हार्ट अटैक से बच्चों की मौत की ये खबरें भी पढ़िए… 9 साल की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत, राजस्थान के स्कूल में खेलते समय गिरी राजस्थान के नागौर के प्राइवेट स्कूल में 9 साल की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत हो गई। 23 फरवरी को वह ग्राउंड में खेलते समय गिर गई थी। स्कूल स्टाफ उसे हॉस्पिटल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पढ़ें पूरी खबर... सीकर में 9 साल की बच्ची को आया कार्डियक अरेस्ट,मौत:स्कूल में टिफिन खोलते समय जमीन पर गिरी; चौथी क्लास में पढ़ती थी राजस्थान के सीकर जिले में 16 जुलाई 2025 को 9 साल की बच्ची की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। बच्ची दांतारामगढ़ के उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर स्कूल में पढ़ती थी। पढ़ें पूरी खबर...