रूस ने अभी तक मिडिल-ईस्ट के समर्थन में कोई ठोस कदम उठाने के बजाय केवल नाराजगी ही जताई है. माना जा रहा है कि रूस का यह रुख पुतिन के यूक्रेन पर फोकस से जुड़ा है. अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है, और खाड़ी देशों की ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इसके चलते रूस को पहले से ही लाभ मिल रहा है.