गाजियाबाद के हरीश राणा मामले में एक मानवीय पहल सामने आई है. पड़ोसी दीपांशु मित्तल ने बताया कि करीब ढाई साल पहले हरीश के पिता अशोक राणा ने अंगदान और देहदान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली थी. परिवार चाहता था कि बेटे के जाने के बाद भी उसके अंग किसी जरूरतमंद को जीवन दे सकें. अब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद एम्स में चल रही प्रक्रिया के बीच यह पहल चर्चा में है.