भारत में मातृत्व अधिकारों को लेकर लंबे समय से बहस चल रही थी। खासतौर पर गोद लेने वाली माताओं के साथ अलग व्यवहार को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court ) ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह साफ किया है कि गोद लेने वाली मां जन्म देने वाली मां से अलग नहीं है और इसी लिए दोनों को समान अधिकार मिलना चाहिए। इसी के चलते कोर्ट ने फैसला लिया है कि गोद लिए हुए बच्चे की उम्र कुछ भी हो मां को 12 हफ्तों की मैटरनिटी लीव मिलनी ही चाहिए।