इजरायल के हमले में अली लारिजानी की मौत ने ईरान की राजनीति में बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है. वह सत्ता, सेना और कूटनीति के बीच संतुलन बनाने वाले अहम चेहरा थे. माना जाता है कि वे मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर चुने जाने के भी खिलाफ थे और सुप्रीम लीडर के चुनाव को टालने की कोशिश भी की थी. इस्लामी शासन में उन्हें एक सेक्यूनर नेता के तौर पर देखा जाता था.