पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में जारी गैस संकट के बीच राज्यों को बड़ी राहत दी है। मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। 23 मार्च 2026 से राज्यों को अब पहले के मुकाबले 20% ज्यादा गैस दी जाएगी। इसके बाद राज्यों को मिलने वाली कुल सप्लाई संकट (प्री-क्राइसिस लेवल) से पहले के स्तर के 50% तक पहुंच जाएगी। क्या है 'प्री-क्राइसिस लेवल'? 'प्री-क्राइसिस लेवल' का मतलब उस समय से है जब देश में गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। फिलहाल राज्यों को बहुत कम सप्लाई मिल रही थी, जिसे अब बढ़ाकर पुरानी डिमांड का आधा (50%) किया गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल और गैस सप्लाई लगभग रुक गई है। ढाबों, होटलों और इंडस्ट्रियल कैंटीन को मिलेगी प्राथमिकता यह जो अतिरिक्त 20% गैस दी जाएगी, उसका इस्तेमाल चुनिंदा सेक्टरों के लिए प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। डॉ. नीरज मित्तल के पत्र के अनुसार, यह सप्लाई मुख्य रूप से रेस्टोरेंट, ढाबों, होटलों और इंडस्ट्रियल कैंटीन को दी जाएगी। इसके पीछे सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि खान-पान की सेवाओं और फूड इंडस्ट्री पर संकट का असर कम से कम हो। फूड प्रोसेसिंग और डेयरी सेक्टर को भी राहत गैस की अतिरिक्त खेप का फायदा फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और डेयरी सेक्टर को भी मिलेगा। इसके अलावा राज्य सरकारों या स्थानीय निकायों द्वारा चलाई जा रही सब्सिडी वाली कैंटीन और आउटलेट्स को भी इसमें शामिल किया गया है। सामुदायिक रसोई को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है ताकि आम लोगों तक भोजन की पहुंच बनी रहे। प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले सिलेंडर की व्यवस्था मंत्रालय ने प्रवासी मजदूरों की जरूरतों का भी ख्याल रखा है। पत्र में कहा गया है कि 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर प्रवासी मजदूरों को उपलब्ध कराया जाए। सचिव ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस अतिरिक्त आवंटन की कालाबाजारी या डायवर्जन (गलत इस्तेमाल) न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं। अगले आदेश तक जारी रहेगी यह व्यवस्था यह नई आवंटन व्यवस्था 23 मार्च से शुरू होकर अगले नोटिफिकेशन तक लागू रहेगी। फिलहाल देश एलपीजी की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में 50% तक की बहाली को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है ताकि आने वाले समय में इसे संकट से पहले वाले सामान्य स्तर (100%) तक ले जाया जा सके। क्यों बने ऐसे हालात? ईरान पर अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से 28 फरवरी 2026 को हमला कर दिया था । दोनों देशों ने मिलकर ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों, परमाणु सुविधाओं और नेतृत्व पर सैकड़ों हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई उच्च अधिकारी मारे गए। अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया। इस युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और आपूर्ति बाधित हुई। यहां से भारत का 80-85% LPG आयात होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा LPG बाहर से आती है। इसी के कारण भारत में LPG किल्लत जैसे हालत बने लेकिन भारत सरकार ने लगातार लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में LPG और तेल की कोई कमी नहीं है।