पंजाब में शनिवार (21 मार्च) को अमृतसर में वेयरहाउस के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप रंधावा जहर खाकर सुसाइड कर लिया। मरने से पहले वीडियो बनाकर उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मंत्री लालजीत भुल्लर को जिम्मेदार ठहराया। जिसके बाद भुल्लर की मंत्री की कुर्सी छिन गई। यह पूरा विवाद तरनतारन में पंजाब स्टेट वेयरहाउस के टेंडर से जुड़ा है। इसका विवाद 2 फर्मों पंजाब की AAP सरकार से इस्तीफा देने वाले ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर लालजीत सिंह भुल्लर के पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और मैसर्ज बाबा नागा एग्रोटेक लिमिटेड के बीच है। दोनों में 17 एकड़ में बनने वाले वेयरहाउस का टेंडर लेने की होड़ थी लेकिन गवर्नमेंट मार्केटप्लेस आईडी GEM/2025/B/6542564 पर बिड मैसर्ज बाबा नागा एग्रोटेक लिमिटेड के नाम खुली। इस पर सुखदेव सिंह भुल्लर ने पंजाब स्टेट वेयरहाउस को लेटर लिख इस टेंडर में नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए और टेंडर को रद्द करने की मांग की। पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने पिछले 2025 में भिखीविंड (पट्टी) में 50 हजार मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम बनाने के लिए टेंडर (आईडी: GEM/2025/B/6542564) निकाला था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पट्टी रेलवे स्टेशन के पास अनाज स्टोर करना था ताकि वहां से अनाज आसानी से ट्रेनों में लोड होकर दूसरे राज्यों में जा सके। इस टेंडर को लेकर इतना विवाद क्यों, गोदाम से कितना फायदा होना था, टेंडर में किन नियमों दरकिनार किया गया… ये जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जानें क्या है टेंडर को लेकर पूरा विवाद… 2025 में भिखीविंड पट्टी में गोदाम बनाने का टेंडर निकला पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने 2025 में भिखीविंड (पट्टी) में 50 हजार टन स्टोरेज लिमिट का गोदाम बनाने के लिए टेंडर निकाला। इस टेंडर के लिए कई कारोबारियों ने हिस्सा लिया। टेंडर की रेस में आप नेता और मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले लालजीत भुल्लर के आढ़ती पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और मैसर्ज बाबा नागा एग्रो टेक लिमिटेड रह गए। टेंडर की फाइनेंशियल बिड मार्च 2026 में मैसर्ज बाबा नागा एग्रो टेक लिमिटेड के नाम खुली, जिस पर सुखदेव सिंह भुल्लर ने आपत्ति जताई। पट्टी के लिए था टेंडर, जमीन तरनतारन की दिखाई विवाद तब शुरू हुआ जब मार्च 2026 में विभाग ने मैसर्ज बाबा नागा एग्रो टेक लिमिटेड की फाइनेंशियल बिड (पैसों वाली बोली) खोल दी। सुखदेव सिंह भुल्लर ने इस पर ऐतराज जताते हुए विभाग को लेटर लिखा। इसमें आरोप लगाया कि गोदाम बनाने के लिए की प्रस्तावित जमीन गांव उसमा में है जो तरनतारन से सटा है। नियम के मुताबिक टेंडर पट्टी इलाके के लिए था, लेकिन जमीन तरनतारन की दिखाई गई। आरोप है कि टेंडर की शर्त के उलट पट्टी से करीब 20-25 किमी दूर दिखाई जमीन के लिए बिड खोल दी गई। जबकि दूरी 8 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। भुल्लर ने डिपार्टमेंट को लिखे लेटर में कहा कि अगर गोदाम पट्टी के बजाय तरनतारन (उसमा) में बनता है, तो ढुलाई पट्टी से वापस तरनतारन की तरफ होगी। इसे तकनीकी भाषा में बैकवर्ड मूवमेंट बताया गया। इससे ट्रकों के चक्कर बढ़ेंगे और सरकार को करोड़ों रुपए का बोझ पड़ेगा। लोकेशन रेलहेड से भी दूर मंत्री भुल्लर के पिता ने आगे कहा- गोदाम बनाने की शर्त है कि ये रोड या रेल लाइन के पास होना चाहिए ताकि ढुलाई की दिक्कत न हो। इस शर्त को लेकर भी सुखदेव सिंह भुल्लर ने आब्जेक्शन जताया। सुखदेव सिंह भुल्लर ने कहा कि बाबा नागा एग्रो टेक लिमिटेड ने जिस जमीन की लोकेशन बताई है वो रेल हेड से करीब 20 किलोमीटर दूर है जबकि पट्टी वाली उनकी जमीन टेंडर की शर्त के अनुसार 8 किलोमीटर के अंदर है। इस नियम की भी टेंडर की फाइनेंशियल बिड खोलते हुए अनदेखी की गई है, इसलिए फाइनेंशियल बिड को रद्द किया जाए। टेंडर में वेयरहाउस डिस्ट्रिक्ट मैनेजर की क्या भूमिका वेयर हाउस का डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) इस पूरी टेंडर प्रक्रिया में विभाग की ग्राउंड रिपोर्ट देता है। उसी की रिपोर्ट पर टेंडर निकलता है। हालांकि इसमें कम बोली की भी भूमिका रहती है। DM की जिम्मेदारी वेयरहाउस बनाने के लिए प्रस्तावित जमीन की मौके पर जाकर वेरिफिकेशन करना रहती है। वही इसके लिए सर्टिफिकेट जारी करता है। इस विवाद में DM की भूमिका इसलिए सवालों के घेरे में है क्योंकि उन्होंने ही उसमा वाली जमीन का निरीक्षण किया था। सुखदेव सिंह भुल्लर का आरोप है कि DM और उनकी टीम ने टेंडर की लोकेशन संबंधी शर्तों के नियमों की अनदेखी की है। गोदाम बनाने वाले को होता करोड़ों का फायदा प्राइवेट एंटरप्रेन्योरशिप गारंटी (PEG) स्कीम के तहत 50 हजार टन कैपेसिटी का गोदाम सरकार ने 10 साल की रेंटल गारंटी पर लेना था। इस स्कीम के तहत शर्त है कि अगर आपका गोदाम एक बार रेंट पर ले लिया तो उसको सरकार यूज करने या न करें लेकिन किराया 10 साल के लिए भरना ही होगा। इसके बाद गोदाम पूरी तरह आपका हो जाएगा। सरकार आमतौर पर 4 रुपए 50 पैसे से 6 रुपए 50 पैसे प्रति क्विंटल प्रति माह का किराया देती है। इस तरह से लगभग 10 साल में 35 करोड़ का किराया मिलता। जानें क्या है PEG स्कीम और इसका फायदा प्राइवेट एंटरप्रेन्योरशिप गारंटी (PEG) स्कीम केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत सरकार खुद गोदाम बनाने के बजाय कारोबारियों को गोदाम बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। सरकार गोदाम के लिए किराया भरती है। जमीन खरीदने के झंझट और मेंटिनेंस से बचने के लिए सरकार ने ये स्कीम चलाई है। कारोबारी अपनी जमीन खरीदकर गोदाम बनाता है और सरकार उसे 10 साल तक किराया देने की गारंटी देती है। भले ही गोदाम खाली रहे, सरकार किराया चुकाती है। इसीलिए इसे जीरो रिस्क बिजनेस माना जाता है। ये खबरें भी पढ़ें… पंजाब-अफसर ने वीडियो में मंत्री का नाम लेकर सुसाइड किया, मंत्री भुल्लर का इस्तीफा, नंगा करके पीटने का आरोप पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के परिवहन मंत्री लालजीत भुल्लर का नाम लेकर एक अधिकारी ने आत्महत्या की है। अमृतसर में वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने शनिवार सुबह जहर खाकर जान दे दी। मरने से पहले उन्होंने 12 सेकेंड का एक वीडियो जारी किया। (पढ़ें पूरी खबर) लाल किला हिंसा में भी दिखे थे भुल्लर:मंत्री बनते ही स्टंट, जातिवादी टिप्पणी की, हर बार बचते रहे; अफसर के सुसाइड से कुर्सी छिनी अमृतसर के वेयरहाउस डिस्ट्रिक्ट मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा के सुसाइड से कुर्सी गंवाने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के मंत्री लालजीत भुल्लर पहली बार विवादों में नहीं फंसे, इससे पहले भी वह लाल किला हिंसा, जातिवादी टिप्पणी से लेकर मंत्री बनते ही स्टंटबाजी को लेकर वह सुर्खियों में रह चुके हैं। हालांकि हर बार उन्हें पार्टी और सरकार का साथ मिलता रहा। कभी सफाई देकर तो कभी माफी मांगकर वह हमेशा बचते रहे। हालांकि इस बार वह सीधे अफसर के सुसाइड केस में फंस गए। पंजाब में एक साल बाद चुनाव है, ऐसी सूरत में AAP सरकार किसी तरह का रिस्क लेने के मूड़ में नहीं है। इसी वजह से मामला मीडिया में आते ही CM भगवंत मान ने तुरंत भुल्लर का इस्तीफा ले लिया। (पढ़ें पूरी खबर)