12 साल की उम्र में जब उसे शादी का मतलब भी नहीं पता था, तब उसकी जिंदगी एक फैसले में बांध दी गई. लेकिन 10 साल बाद उसी लड़की ने हिम्मत दिखाई, कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपनी बचपन की उस जबरन शादी को खत्म कर आजाद जिंदगी की नई शुरुआत कर दी. ये कहानी जोधपुर की बेटी की है, जिसने एक मिसाल पेश की है, जो कई और बेटियों को आवाज दे रही है.