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धरातल पर न तो इन विश्वविद्यालयों का कोई भवन है, न पर्याप्त स्टाफ और न ही कोई छात्र. लेकिन इन 'भूतिया' विश्वविद्यालयों के नाम पर सरकारी खजाने से हर साल करोड़ों रुपये धड़ल्ले से स्वाहा हो रहे हैं. aajtak.in के संवाददाता ने जब जयपुर के शिक्षा संकुल पहुंचकर इन विश्वविद्यालयों की जमीनी हकीकत टटोली, तो प्रशासनिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ती नजर आईं.
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