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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के खोड़ा क्षेत्र में 17 वर्षीय सूर्य प्रताप चौहान की हत्या का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस घटना को लेकर अब धार्मिक प्रवक्ता धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी का बयान सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। “फ्रेंड जिहाद” शब्द के इस्तेमाल पर बयान धीरेंद्र शास्त्री जी ने इस घटना का जिक्र करते हुए इसे “फ्रेंड जिहाद” की संज्ञा दी। उन्होंने दावा किया कि देश में पहले से अलग-अलग प्रकार के “जिहाद” जैसे लव जिहाद, लैंड जिहाद और अन्य शब्दों की चर्चा होती रही है, और अब एक नया रूप सामने आया है जिसे उन्होंने फ्रेंड जिहाद बताया। उनका कहना था कि गाजियाबाद की यह घटना इसी श्रेणी में आती है, हालांकि इस दावे को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने “हिंदुत्व इंटेलिजेंस” की अवधारणा का उल्लेख किया। उनके अनुसार, समाज में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हिंदू समाज के भीतर अधिक सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एकजुट होने की जरूरत है, ताकि “हिंदू एकता” मजबूत हो सके। धीरेंद्र शास्त्री जी ने श्रद्धा और अंधविश्वास के अंतर को भी स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और अंधविश्वास को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हनुमान चालीसा, मंदिर दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों को अंधविश्वास की श्रेणी में रखना उचित नहीं है, क्योंकि ये आस्था का हिस्सा हैं। गुजरात सहित देश के कई हिस्सों में युवाओं में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति पर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि नशे की आदतों से दूर रहकर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की ओर ध्यान देना चाहिए। इस पूरे मामले पर कांग्रेस के प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करते हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग धार्मिक पहचान का उपयोग कर राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि वास्तविक मुद्दों जैसे बेरोजगारी और नशे पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि समाज में बढ़ती समस्याओं के लिए केवल एक पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनके अनुसार, युवाओं में बढ़ते तनाव और नशे की समस्या के पीछे बेरोजगारी और अवसरों की कमी भी बड़ा कारण है। गाजियाबाद की इस घटना और उस पर आए बयानों के बाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच जारी है, जबकि बयानबाजी के चलते यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
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