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इनपुट- अंशुमान दुबे, लखनऊ ताजा मामला राजधानी लखनऊ में लखनऊ विकास प्राधिकरण के जोन दो का है जहां कुकुरमुत्ते की तरह से असुरक्षित जानलेवा और अवैध होटलों का संचालन बड़ी आसानी से हो रहा है और भूमाफिया सरीखे मनबढ़ दबंग बिल्डरों और रिश्वतजीवी एलडीए और फायर विभागों के भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसे अवैध होटल लगातार बढ़ते ही चले जा रहे हैं । ऐसे ही बिना मानकों नियमों नक्शे और सुरक्षा साधनों के दो होटल कानपुर रोड स्थित बरिगँवा में स्थित है इन होटलों के निर्माण और इनके सुरक्षा इंतजामों को लेकर जब इनके संचालकों और बिल्डिंग मालिक से बात की गई तो उनके पास न तो व्यवसायिक नक्शा ही एलडीए से स्वीकृत मिला जैसा कि वर्तमान में निर्माण है और न ही उसमें कोई सेटबैक ही छोड़ा गया है । इसके अलावा इन होटलों में सुरक्षा संबंधी इंतजाम भी नहीं थे और न ही फायर विभाग की एनओसी ही इन्हें हासिल है । अब प्रश्न ये उठता है कि आखिर किसकी सहमति और किसकी देखरेख में इन होटल मालिकों ने इन जान जोखिम में डालने वाले खतरनाक होटलों का निर्माण कर लिया और कैसे इसे संचालित भी कर लिया ? बारिगंवा में अपोलो हॉस्पिटल के निकट खुले 569/222/1 पर बना होटल ब्लू बेल इन , लोकबंधु अस्पताल वाली सड़क पर बरिगंवा पर ही बना होटल जे पी इंटरनेशनल और गली में बना होटल लखनऊ इन इसी प्रकार के होटल हैं जिनके निर्माण में नक्शे , नियम , मानकों , सुरक्षा इंतजामों की पूरी तरह अनदेखी की गई है । क्या कहते हैं होटल खोलने, संचालित करने के नियम- उत्तर प्रदेश में होटल या रेस्टोरेंट खोलने के लिए आपको नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इसके लिए सरकार द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं जिसमें एफएसएसएआई द्वारा आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण भोजन की सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से लाइसेंस अनिवार्य है।यही नहीं स्थानीय नगर निगम या नगरपालिका से व्यापार लाइसेंस लेना आवश्यक भी आवश्यक है जिसके आधार पर व्यापार शुरू किया जाता है । भवन और व्यवसाय का रजिस्ट्रेशन दुकान एवं स्थापना अधिनियम (Shop and Establishment Act) के तहत पंजीकरण होना चाहिए । इसके साथ जीएसटी पंजीकरण: व्यवसाय के लिए अत्यंत आवश्यक है । उत्तर प्रदेश सरकार के नए दिशा-निर्देश (सुरक्षा और स्वच्छता) संचालक का विवरण: होटल, ढाबे या रेस्टोरेंट के बाहर संचालक, प्रोपराइटर और मैनेजर का नाम और पता प्रमुखता से लिखा होना चाहि यही नहीं होटल में काम करने वाले स्टाफ का सत्यापनऔर सभी कर्मचारियों और शेफ का पुलिस सत्यापन (Police Verification) अनिवार्य है । सीसीटीवी (CCTV): ग्राहकों के बैठने की जगह और किचन सहित पूरे प्रतिष्ठान में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य है, ताकि किसी भी अनैतिक गतिविधि या मिलावट को रोका जा सके , खाना बनाते और परोसते समय मास्क व ग्लव्स पहनना अनिवार्य है । निर्माण और भूमि नियम (यूपी सरकार द्वारा हालिया छूट) के लिए योगी सरकार ने छोटे होटल खोलना आसान कर दिया है। 6 से 20 कमरों तक के होटलों के लिए न्यूनतम जमीन के क्षेत्रफल की बाध्यता खत्म कर दी गई है । अब आवासीय क्षेत्रों में 9 मीटर चौड़ी सड़क और गैर-आवासीय क्षेत्रों में 12 मीटर चौड़ी सड़क पर होटल बनाए जा सकते है मगर उनको सेटबैक पार्किंग की जगह होनी चाहिए , आग से बचाव के लिए स्थानीय अग्निशमन विभाग (Fire Department) से एनओसी प्राप्त करना भी आवश्यक है । अवैध निर्माणों पर विशेष रूप से नज़र रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता समाजसेवी वीरेंद्र सिंह सोमवंशी तो खुल कर कहते हैं कि सरकार ने जिस भी विभाग को जिम्मेदारी दी कि वो अवैध निर्माणों को रोकें और सुरक्षा मानकों को पूरा करें वही विभाग और उसके अधिकारी रिश्वत ले लेकर इन खतरनाक होटलों को संरक्षण देते रहे और इन्हीं जैसे रिश्वतजीवी भ्रष्ट लोगों के कारण ही दिल्ली में निर्दोष लोगों की जान चली गई । उच्च न्यायालय की ही अधिवक्ता मीनाक्षी दुबे का कहना है कि सरकार ने जब नियम कानून मानक तय किए हैं तो उनका पालन करने वाले अधिकारी क्यों नहीं बनाए ? क्यों रिश्वत लेने वाले और घूस लेने वाले लोगों को ही जिम्मेदारी दे रखी है अवैध निर्माणों को रोकने की ? क्या उत्तर प्रदेश सरकार में ईमानदार सरकारी अधिकारियों और कानून का राज स्थापित करने वाले अधिकारी हैं ही नहीं ?
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