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करीब सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति नॉर्थ कोरिया की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं. यह सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि एशिया की बदलती भू-राजनीति, रूस-चीन-नॉर्थ कोरिया की नई धुरी और अमेरिका के खिलाफ बन रहे रणनीतिक समीकरणों का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
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