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प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एल नीनो परिस्थितियों ने मौसम वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. विशेषज्ञ लगातार इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं. भारत समेत कई देशों में मानसून, वर्षा वितरण, कृषि गतिविधियों और तापमान पर इसके असर को लेकर चर्चा तेज है. मौसम से जुड़े विभिन्न मॉडल और आंकड़े आने वाले महीनों की स्थिति का आकलन करने में जुटे हैं. किसानों और आम लोगों की नजर भी इस घटनाक्रम पर बनी हुई है.
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