Dainik Bhaskar
अगले महीने 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से चार राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने जीत के कथित फॉर्मूले यानी कैश ट्रांसफर पर बड़ा दांव लगाया है। चारों राज्य महिलाओं के बैंक खाते में सीधे 24500 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर रहे हैं। चुनावी वादा भी यही है कि सत्ता में आए तो ऐसे ही 5 साल तक पैसे खातों में जाते रहेंगे। तमिलनाडु की DMK सरकार ने 2-2 हजार रु. स्पेशल समर पैकेज के नाम पर महिलाओं के खाते में डाल दिए। असम की भाजपा सरकार ने बिहू मनाने के लिए 4-4 हजार रुपए दे दिए। केरल की वामपंथी सरकार भी स्त्री सुखम नकद योजना ले आई। 10 लाख महिलाओं को हर महीने 1-1 हजार रुपए मिल रहे हैं। बंगाल की तृणमूल सरकार तो फरवरी में लक्ष्मी भंडार स्कीम में 500 रु. बढ़ा चुकी है। खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के बावजूद ममता बनर्जी की तृणमूल सरकार को अगले साल 5 हजार करोड़ देने पड़ेंगे। इसी स्कीम ने 2021 के चुनाव में ममता को जीत दिलाई थी। चारों राज्यों में सभी योजना की लाभार्थी महिलाओं की संख्या 4.1 करोड़ है, जबकि कुल वोटर 17.89 करोड़। यानी इनमें नकद स्कीमों की कुल लाभार्थी 23% हैं। अब 15 राज्य दे रहे महिलाओं को नगद सहायता बीते 5 साल में हुए चुनावों का ट्रेंड देखें तो पता चला है कि महिलाओं को नकद ट्रांसफर देने वाले राज्यों की संख्या एक से बढ़कर 15 हो गई है। ये राज्य 13 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को 2.46 लाख करोड़ रु. तक सालाना नकद पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं, जो इन राज्यों के कुल बजट का 0.7% है। झारखंड जैसा राज्य अपने ग्रामीण विकास के कुल बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर में दे रहा है। लेकिन, ट्रेंड ये भी है कि जो राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर खर्च कर रहे हैं, वहां कई योजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं। नकद स्कीमों के चलते महाराष्ट्र-कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों को अपने अहम खर्चों में कटौती करनी पड़ी है। इन राज्यों में गेमचेंजर बनीं कैश ट्रांसफर वाली योजनाएं चुनावी राज्यों में ये भी ‘मुफ्त’ योजनाएं... तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशनकार्डधारकों को मुफ्त फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस सिलेंडर मुफ्त। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम में अब 62 लाख लोग। पेंशन भी 600 रु. बढ़ाकर 2 हजार रु. की। बंगाल में 1500 करोड़ रु. बेरोजगार युवा पेंशन पर खर्च हो रहे हैं।
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