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ईरान में फंसे भारतीय नाविकों ने जंग के बीच अपने भयावह अनुभव साझा किए. डीजल तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए चालक दल को 27 फरवरी को रिहाई मिली, लेकिन अगले दिन युद्ध शुरू हो गया. बंदर अब्बास में मिसाइल हमलों के बीच वे कई दिन बिना सोए रहे. बाद में भारतीय दूतावास की मदद से 1800 किमी का जोखिम भरा सफर तय कर आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटे.
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