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ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण विश्व भर में उत्पन्न हुए तेल संकट के बीच भारत एक बार फिर दक्षिण एशिया के लिए 'रक्षक' बनकर उभरा है। जहाँ एक ओर श्रीलंका, मालदीव और नेपाल जैसे पड़ोसी देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भारत की ओर देख रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत की इस बढ़ती साख ने पाकिस्तान के विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस कठिन समय में निरंतर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया है। श्रीलंका की इस कृतज्ञता ने पाकिस्तानी विश्लेषक कमर चीमा को विचलित कर दिया है। चीमा ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि जब पाकिस्तान के संबंध ईरान के साथ इतने गहरे हैं, तो वह इस अवसर का लाभ उठाने में विफल क्यों रहा? कमर चीमा ने अपनी सरकार को परामर्श दिया है कि पाकिस्तान को दक्षिण एशियाई देशों की सहायता कर अपनी स्थिति मजबूत करनी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से प्रतिदिन पाकिस्तान के दो जलयानों को गुजरने की अनुमति दे दी है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भूल रहे हैं कि जो देश स्वयं भारी कर्ज के बोझ तले दबा हो और जहाँ महंगाई आकाश छू रही हो, अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है, ऐसे समय में कमर चीमा पाकिस्तानी सरकार को सलाह दे रहे है, कि वह दुसरे मुल्कों की मदद करे। भला जो खुद दाने-दाने को मोहताज हो, वह दुसरे देशों की सहायता कैसे कर सकता है? यह तो वही बात हुई कि- 'अपनी गॉंठ नंगा, औरों को दे दान' । जो खुद कर्ज के बोझ तले दबा है, वह दूसरों की सहायता करने के सपने देख रहा है। "भारत को मिल रहे सम्मान से चिढ़े पाक विशेषज्ञ ने दावा किया है कि पाकिस्तान को नेपाल, मालदीव और बांग्लादेश से संपर्क साधना चाहिए था, क्योंकि वर्तमान में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित है।" पाकिस्तान स्वयं को अमेरिका और ईरान के बीच 'बिचौलिये' के रूप में प्रस्तुत करने का असफल प्रयास कर रहा है। कमर चीमा ने यहाँ तक दावा कर दिया कि अमेरिका और ईरान की बैठक पाकिस्तान में होने जा रही है। परंतु, ईरान ने पाकिस्तान के इन दावों की धज्जियाँ उड़ाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की सीधी वार्ता नहीं करेगा। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री की अन्य देशों के साथ बैठकें उनकी अपनी व्यक्तिगत पहल हो सकती हैं, तेहरान का इससे कोई लेना-देना नहीं है। जहाँ भारत अपनी सशक्त कूटनीति और संसाधनों के बल पर पड़ोसियों की सहायता कर 'विश्व गुरु' की भूमिका निभा रहा है, वहीं पाकिस्तान केवल खोखले दावों और आंतरिक कलह में उलझा हुआ है। श्रीलंका और मालदीव द्वारा भारत की सराहना करना यह सिद्ध करता है कि दक्षिण एशिया में केवल भारत ही एक विश्वसनीय शक्ति है।
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