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आम आदमी पार्टी कभी वैचारिक राजनीति और नए तरह के नेतृत्व की उम्मीद बनकर उभरी थी, लेकिन अब पार्टी के भीतर वफादारी और महत्वाकांक्षा के टकराव की कहानी सामने आ रही है. योगेंद्र यादव से लेकर राघव चड्ढा तक, कई बड़े चेहरे अलग होते दिखे. सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ व्यक्तित्वों का टकराव है या पार्टी की संरचना में ही कोई बुनियादी खामी है.
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