Sudarshan News
हाल ही में भारत ने अपने घरेलू तेल उत्पादन को बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका‑ईरान के बीच जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरुमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है और कई देशों में तेल संकट की स्थिति बनी है। ऐसे समय में भारत ने अपनी निरंतर तेल आपूर्ति सुनिश्चित रखने के लिए थार रेगिस्तान (Rajasthan) में स्थित तेल क्षेत्र से कच्चा तेल निकालने पर जोर दिया है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान के थार रेगिस्तान के जोधपुर बलुआ पत्थर संरचना से कच्चे तेल का उत्पादन तेजी से बढ़ाया है। यहां का बाघेवाला तेल क्षेत्र अब दैनिक 1,202 बैरल कच्चा तेल निकाल रहा है, जो पिछले साल के लगभग 705 बैरल प्रति दिन के मुकाबले करीब 70 प्रतिशत अधिक है। यह उत्पादन भारत के लिए एक रिकॉर्ड स्तर है। यह बढ़ोतरी पहले से मौजूद तेल कुओं की संख्या बढ़ाने, नई तकनीकों का इस्तेमाल करने और कुशल ड्रिलिंग प्रक्रियाओं के कारण संभव हुई है। कंपनियों ने हाई‑विस्कोसिटी तेल निकालने के लिए नई तकनीक “Cyclic Steam Stimulation” का इस्तेमाल किया है, जिसने उत्पादन क्षमता को काफी मजबूत किया है। थार रेगिस्तान से मिलने वाला यह कच्चा तेल टैंकरों और पाइपलाइन के माध्यम से गुजरात के मेहसाणा और कोयली रिफाइनरी तक पहुंचाया जाता है, जहाँ इसे परिष्कृत किया जाता है और देश में ईंधन की सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे भारत की विदेश पर निर्भरता कम होती है और घरेलू ऊर्जा जरूरतें अधिक सुरक्षित होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम समय पर लिया गया है क्योंकि वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी हुई है। थार प्लान की सफलता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रही है और यह दर्शाती है कि देश मुश्किल समय में भी अपनी आवश्यक तेल आपूर्ति को सुरक्षित रख सकता है। त्यों कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आने वाले समय में तेल की कीमत और विदेश पर निर्भरता दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
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