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इजरायल ने 1950 और 60 के दशक के बीच, मुख्य रूप से फ्रांस की गुप्त मदद से डिमोना में नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थापित कर दुनिया से छुपकर परमाणु हथियार विकसित किए. 1967 के युद्ध के आसपास ही उसके पास परमाणु क्षमता आ गई थी. अमेरिका को इस कार्यक्रम से दूर रखने और तकनीकी सामग्री के लिए मोसाद ने चोरी और गुप्त समझौतों का सहारा लिया.
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