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देश की भाषाई विविधता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में सिंधी भाषा में संविधान का नवीनतम संस्करण जारी किया। यह संस्करण देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में तैयार किया गया है, जिससे अधिक लोगों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर सिंधी भाषी समाज को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा देश की प्राचीन भाषाओं में से एक है, जिसकी साहित्यिक परंपरा ज्ञान, विचार और मानव मूल्यों को जोड़ने का कार्य करती रही है। उन्होंने इस भाषा को एकता और भाईचारे का प्रतीक बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार देवनागरी लिपि में सिंधी भाषा में संविधान का प्रकाशन एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान केवल कानून का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और शासन को दिशा देता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विभिन्न भारतीय भाषाओं में संविधान को उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब नागरिक अपनी मातृभाषा में संविधान को समझते हैं, तो लोकतांत्रिक भागीदारी और विश्वास दोनों मजबूत होते हैं। उपराष्ट्रपति ने यह भी बताया कि संविधान को कई अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे देश की विविधता का सम्मान होता है। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में है और भाषाएं हमारी संस्कृति और पहचान की आधारशिला हैं। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संविधान को आम लोगों तक सरल रूप में पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया।
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