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अनाज संकट पर CM मान की दिल्ली में बड़ी बैठक; केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से कई अहम मुद्दों पर की चर्चा... 155 लाख मीट्रिक टन अनाज लिफ्टिंग पर बनी सहमति | Collector
अनाज संकट पर CM मान की दिल्ली में बड़ी बैठक; केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से कई अहम मुद्दों पर की चर्चा... 155 लाख मीट्रिक टन अनाज लिफ्टिंग पर बनी सहमति
Sudarshan News

अनाज संकट पर CM मान की दिल्ली में बड़ी बैठक; केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से कई अहम मुद्दों पर की चर्चा... 155 लाख मीट्रिक टन अनाज लिफ्टिंग पर बनी सहमति

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। इस बैठक में राज्य के किसानों, आढ़तियों और अनाज भंडारण व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि पंजाब में पड़े लगभग 155 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की निकासी के लिए विशेष रेल सेवाएं चलाने पर सहमति बनी है। इससे राज्य में बढ़ते भंडारण संकट को कम करने में मदद मिलेगी और आगामी रबी खरीद सीजन से पहले जगह खाली हो सकेगी। मुख्यमंत्री मान ने बताया कि राज्य के कवरड गोदामों में पहले से ही करीब 180.88 लाख मीट्रिक टन अनाज भरा हुआ है, जिसमें लगभग 151.20 लाख मीट्रिक टन चावल और 29.67 लाख मीट्रिक टन गेहूं शामिल है। राज्य की कुल कवरड भंडारण क्षमता लगभग 183 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें साइलो क्षमता भी शामिल है। ऐसे में चावल के लिए केवल लगभग 0.50 लाख मीट्रिक टन जगह बची है। वहीं, गेहूं के लिए करीब 1.75 लाख मीट्रिक टन साइलो स्पेस उपलब्ध है। नए मंडीकरण सीजन में बढ़ता दबाव 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए रबी मंडीकरण सीजन 2026-27 में पंजाब में करीब 130132 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का अनुमान है। इसके साथ ही पिछले वर्ष का करीब 38 लाख मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक भी दबाव बढ़ा रहा है, जिसमें से 8.71 लाख मीट्रिक टन अभी भी खुले या CAP स्टोरेज में पड़ा है। इससे लगभग 40 लाख मीट्रिक टन अनाज को कम सुरक्षित परिस्थितियों में रखना पड़ सकता है। सीएम मान ने कहा कि केंद्र की ओर से गेहूं और चावल की निकासी औसतन केवल 5 लाख मीट्रिक टन प्रति माह हो रही है, जबकि आवश्यकता कम से कम 12 लाख मीट्रिक टन प्रति माह की है। उन्होंने सुझाव दिया कि या तो उठान तेज किया जाए या फिर जरूरत के अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (जैसे पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना) के तहत वितरण बढ़ाया जाए, जैसा कोविड काल में किया गया था। बैठक में ग्रामीण विकास फंड (RDF) के तहत पंजाब के लगभग 9000 करोड़ रुपये के बकाया का मुद्दा भी उठाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि मंडियों के विकास और सड़कों के सुधार के लिए जरूरी है, लेकिन अभी तक जारी नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और केंद्र को इसे जल्द सुलझाना चाहिए। सीएम मान ने नकद ऋण सीमा (CCL) पर लगाई जा रही उच्च ब्याज दरों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि, भारतीय स्टेट बैंक द्वारा ली जा रही दरें अधिक हैं ब्याज चक्रवृद्धि (compound) आधार पर लिया जा रहा है। जबकि एफसीआई मानकों के अनुसार केवल साधारण ब्याज की अनुमति है। इससे राज्य को हर सीजन में करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। आढ़तियों और कमीशन एजेंटों की मांगें आढ़तियों के कमीशन का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। वर्तमान में केंद्र द्वारा तय दरें धान के लिए लगभग 45.88 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं, गेहूं के लिए लगभग 46 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि आढ़ती 2.5% कमीशन की मांग कर रहे हैं। इस पर केंद्र सरकार ने भविष्य में समीक्षा के लिए सचिव स्तर की बैठक बुलाने का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंडी मजदूरों के ईपीएफ से जुड़े मामलों और असामयिक बारिश व ओलावृष्टि से फसल नुकसान पर मुआवजे की मांग भी रखी। किसानों की राहत को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सभी मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित मामलों पर सचिव स्तर पर तंत्र बनाकर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

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