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बठिंडा स्थित महाराजा रणजीत सिंह पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय (एमआरएसपीटीयू) में गुरुवार को तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गुलाब चंद कटारिया ने की। 184 डिग्रियां प्रदान, पीएचडी से लेकर स्नातक तक शामिल इस दीक्षांत समारोह में कुल 184 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। इनमें शामिल हैं: 115 स्नातक (UG) 56 स्नातकोत्तर (PG) 13 पीएचडी डिग्री समारोह में मेधावी छात्रों को स्वर्ण और रजत पदक भी प्रदान किए गए, जिनमें अधिकतर छात्राएं रहीं। छात्रों को तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रेरणा राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अपने संबोधन में छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ग्रीन एनर्जी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़कर देश के विकास में योगदान देना चाहिए। राज्यपाल ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें केवल रोजगार पाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रोजगार सृजनकर्ता बनकर दूसरों के लिए अवसर पैदा करने चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान को वास्तविक समस्याओं के समाधान में बदलना ही सच्ची शिक्षा का उद्देश्य है। अपने संबोधन में उन्होंने तकनीकी शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह न केवल मानव संसाधन को मजबूत करती है, बल्कि औद्योगिक विकास और जीवन स्तर सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।' राज्यपाल ने युवाओं से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की और नशामुक्त पंजाब के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने एक संवेदनशील और समावेशी समाज बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने तख्त श्री दमदमा साहिब को ऐतिहासिक शिक्षा केंद्र बताते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेकर मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि जिम्मेदार नागरिक तैयार किए जा सकें। समारोह में कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें संस्थान की उपलब्धियों, शैक्षणिक प्रगति और विकास यात्रा की जानकारी दी गई।
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