Sudarshan News
देश के प्रमुख बंदरगाहों पर हाल ही में पश्चिम एशिया में उत्पन्न भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आई बाधाओं के कारण जो कार्गो बैकलॉग और संचालन संबंधी रुकावटें पैदा हुई थीं, उन्हें अब काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जानकारी दी कि मंत्रालय के समय पर हस्तक्षेप और लगातार निगरानी के चलते लगभग 90 प्रतिशत लंबित कार्गो को सफलतापूर्वक साफ कर दिया गया है। मंत्री ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में विभिन्न बंदरगाह प्राधिकरणों, लॉजिस्टिक्स एजेंसियों और कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से स्थिति को तेजी से सामान्य करने में मदद मिली है। शुरुआती दौर में जहाजों की आवाजाही और माल ढुलाई प्रभावित हुई थी, लेकिन सरकार की सक्रिय रणनीति और त्वरित निर्णयों के कारण व्यापार पर पड़ने वाले असर को काफी हद तक कम किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल संचालन को बहाल करना नहीं बल्कि निर्यातकों, आयातकों और सभी हितधारकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। बैठक में मंत्री ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार द्वारा घोषित राहत उपायों जैसे ग्राउंड रेंट माफी और रेफर चार्ज में छूट का लाभ सीधे संबंधित हितधारकों तक पहुंचे और इसमें किसी भी प्रकार की देरी या बाधा न आए। इसके साथ ही उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि इस स्थिति का उपयोग किसी भी तरह से अनावश्यक मुनाफाखोरी के लिए नहीं किया जाना चाहिए और सभी चार्ज पारदर्शी तरीके से तय किए जाएं। इस समीक्षा के दौरान भारतीय बंदरगाह प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले प्रमुख बंदरगाहों की स्थिति की भी समीक्षा की गई, जिसमें बताया गया कि जेएनपीटी, दीनदयाल पोर्ट, न्यू मैंगलोर पोर्ट और मुंबई पोर्ट जैसे प्रमुख केंद्रों पर लंबित माल को लगभग पूरी तरह से साफ कर दिया गया है। सरकार ने कहा है कि आगे भी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी संभावित वैश्विक व्यवधान का तुरंत समाधान किया जा सके और भारत की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनी रहे।
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