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इस्लामाबाद वार्ता फेल, फिर भी नहीं गई पाकिस्तान की बेशर्मी; ईरान और अमेरिका के तलवे चाटने पर मजबूर हुए इशाक डार... जानिए 'शुक्रिया' के पीछे का असली पाखंड | Collector
इस्लामाबाद वार्ता फेल, फिर भी नहीं गई पाकिस्तान की बेशर्मी; ईरान और अमेरिका के तलवे चाटने पर मजबूर हुए इशाक डार... जानिए 'शुक्रिया' के पीछे का असली पाखंड
Sudarshan News

इस्लामाबाद वार्ता फेल, फिर भी नहीं गई पाकिस्तान की बेशर्मी; ईरान और अमेरिका के तलवे चाटने पर मजबूर हुए इशाक डार... जानिए 'शुक्रिया' के पीछे का असली पाखंड

पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का वजूद ही झूठ और धोखे की बुनियाद पर टिका है। एक तरफ ईरान और इज़रायल के बीच बारूदी जंग की आहट है, तो दूसरी तरफ दुनिया का सबसे बड़ा 'आतंकवादी कारखाना' यानी पाकिस्तान अब शांति का मसीहा बनने का ढोंग कर रहा है। इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बुरी तरह विफल रही, लेकिन अपनी फजीहत को छिपाने के लिए पाकिस्तान अब भी डींगें हांकने से बाज़ नहीं आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला, उसके लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार अब ईरान और अमेरिका, दोनों को 'शुक्रिया' कह रहे हैं। असल में यह 'शुक्रिया' किसी शांति के लिए नहीं, बल्कि इज़रायल के संभावित प्रहार से बचने और अमेरिका से मिलने वाली भीख के लिए की गई एक घटिया कूटनीति है। पाकिस्तान को अच्छी तरह पता है कि अगर मध्य-पूर्व में युद्ध छिड़ा, तो इज़रायल के शौर्य के सामने ईरान का टिकना मुश्किल होगा। ऐसे में अपनी कंगाली और बदहाली से डरा पाकिस्तान अब अमेरिका की चापलूसी कर रहा है ताकि वाशिंगटन की नज़रों में बना रहे। पाकिस्तान का यह 'शांति राग' केवल एक दिखावा है, क्योंकि जो देश खुद आतंकवाद का केंद्र हो, वह शांति की बात कैसे कर सकता है? इस्लामाबाद की यह वार्ता केवल एक कागजी खानापूर्ति थी। पाकिस्तान का 'शुक्रिया' कहना यह सिद्ध करता है कि वह अंदर से बुरी तरह डरा हुआ है। उसे न ईरान की चिंता है और न ही विश्व शांति की, उसे चिंता है तो बस अपनी डूबती हुई अर्थव्यवस्था और इज़रायल के उस पराक्रम की, जिससे पूरी दुनिया के आतंकी देश थर-थर कांपते हैं।

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