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भारतीय सेना ने सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज (CLAWS) के सहयोग से आज नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में जनरल जोरावर सिंह के रणनीतिक कौशल और सैन्य विरासत पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर भारतीय सैन्य इतिहास के इस महान योद्धा के योगदान और उनकी उच्च-ऊंचाई युद्ध रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमें लेफ्टिनेंट जनरल घनश्याम सिंह कटोच (सेवानिवृत्त) द्वारा लिखित “द स्नो लायन: ए मिलिट्री बायोग्राफी ऑफ जनरल जोरावर सिंह” और ब्रिगेडियर जीवन सिंह राजपुरोहित (सेवानिवृत्त) की पुस्तक “लीड लाइक ए लीजेंड” शामिल हैं। इन पुस्तकों में जनरल जोरावर सिंह के सैन्य अभियानों, प्रशासनिक क्षमता और रणनीतिक सोच को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। मुख्य वक्तव्य में लेफ्टिनेंट जनरल एमपी सिंह ने जनरल जोरावर सिंह की विरासत को आधुनिक पर्वतीय युद्ध सिद्धांतों से जोड़ते हुए कहा कि उनकी रणनीतियां आज भी भारतीय सेना के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व और सैन्य कौशल ने देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा की नींव मजबूत की। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सेवानिवृत्त अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ और लेखक भी शामिल हुए। फायरसाइड चैट सत्र में जनरल जोरावर सिंह की लॉजिस्टिक क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और युद्ध कला पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने उनके योगदान को भारतीय सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण आधार बताया और कहा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
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